Sunday, 18 November 2012

कम्पाउंडिंग, समझौता शुल्क


यह होती है कम्पाउंडिंग 

मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम 1956 की धारा 308 के तहत कम्पाउंडिंग किए जाने का प्रावधान है। इसमें अनुमति से 10 प्रतिशत ज्यादा तक अवैध निर्माण हो तो नगर निगम शुल्क लेकर उतना निर्माण छोड़ सकता है। इस प्रक्रिया को ही कम्पाउंडिंग कहा जाता है। हालांकि इसमें यह शर्त होती है कि ऐसा कोई भी निर्माण जिसकी कम्पाउंडिंग की जा रही है, वह भवन के सामने का खाली हिस्सा (फ्रंट एमओएस) न हो। पार्किंग के लिए छोड़े गए स्थान की भी कम्पाउंडिंग नहीं की जा सकती। 

यह है समझौता शुल्क 

इसमें निगम और संबंधित प्लॉटधारक के बीच समझौता होता है। इसके एवज में प्लॉटधारक को निर्धारित शुल्क जमा करना होता है। 

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Wednesday, 11 April 2012

नई गाइडलाइन






नई गाइडलाइन के बाद अब रजिस्ट्री कराने वालों को बरतना होगी सावधानी 

नई गाइडलाइन में शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि गलत तरीके से रजिस्ट्री कराने वालों को भी नुकसान भुगतना होगा। पिछले कुछ समय से अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर रजिस्ट्री कराने के काफी मामले आ रहे थे जिसे देखते हुए अब नियम कठोर कर दिए हैं। अब ऐसे मामले में जिला पंजीयक रजिस्ट्री शून्य भी घोषित कर सकता है। अब एरोड्रम क्षेत्र में भी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोला जा रहा है। 

संपत्ति विवादों में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए लोग उन सब रजिस्ट्रार को पकड़ते थे जो उनके दिए दस्तावेजों से संतुष्ट होकर रजिस्ट्री कर दे। ऐसे में अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर भी रजिस्ट्रियां हो रही थी। इंदौर में अब एरोड्रम क्षेत्र में भी पंजीयन विभाग कार्यालय खोल रहा है जिसे मिलाकर अब चार ऑफिस शहर में हो जाएंगे। वरिष्ठ जिला पंजीयक डॉ. श्रीकांत पांडे ने बताया इसी सप्ताह से यह ऑफिस शुरू कर दिया जाएगा। 



इनका रखें ध्यान

> संपत्ति का क्षेत्र किस सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के अधीन है। कौन-सा सब-रजिस्ट्रार संबंधित रजिस्ट्री करने के लिए अधिकृत है।

> किसी सब-रजिस्ट्रार से उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर रजिस्ट्री कराई तो वह शून्य मानी जाएगा। उसकी कोई कीमत नहीं होगी। संबंधित सब-रजिस्ट्रार पर कानूनी कार्रवाई भी होगी। पिछले वर्ष अधिकार से बाहर रजिस्ट्री होने के कई मामले सामने आए थे। एक सब-रजिस्ट्रार को सस्पेंड भी किया गया था।

अंकों से पहचानें

सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को नाम के बजाय अंकों के माध्यम से पहचाना जाएगा। मोती तबेला स्थित मुख्य कार्यालय को एक, नवलखा कार्यालय को दो, सुखलिया को तीन और एरोड्रम कार्यालय को चार नंबर कोड दिया है।


कहां, कौन-सी होगी रजिस्ट्री

> मोती तबेला (नंबर एक) में नगरनिगम के वार्ड आठ से 16, 24, 54, 55, 57 से वार्ड 66 तक की रजिस्ट्री होगी।

> नवलखा (नंबर-दो) वार्ड 27, 43 से 53 और 56।

> सुखलिया (नंबर तीन) 23, 25, 26, 28 से 42 तक।

> एरोड्रम (नंबर चार) वार्ड 1 से 5, 17 से 22, 67 से 69 व हातोद।




क्षेत्र                              पुराना भाव                           वर्तमान दर                   बढ़ोतरी

बिजलपुर                     2 करोड़़ 25 लाख                 4 करोड़                        1 करोड़ 75 लाख

तेजपुर गड़बड़ी             2 करोड़ 25 लाख                   4 करोड़                        1 करोड़ 75 लाख

पीपल्याहाना                2 करोड 25 लाख                   4 करोड़                        1 करोड़ 75 लाख

पीपल्याराव                 2 करोड़                                4 करोड                            2 करोड़

खजराना                     2 करोड़                                3 करोड़ 50 लाख              डेढ़ करोड़

निरंजनपुर                   दो करोड़                              3 करोड़ 50 लाख              डेढ़ करोड़

बिचौली मर्दाना           1 करोड़ 65 लाख                    3 करोड़ 50 लाख             1 करोड़ 85 लाख

बडिय़ाकीमा                95 लाख                                डेढ़ करोड़                         55 लाख

सिरपुर                       1 करोड़ 25 लाख                   ढाई करोड़                        1 करोड़ 25 लाख

नैनोद                         50 लाख                               एक करोड़ 75 लाख           1 करोड़ 25 लाख

सिरपुर                      1 करोड़ 25 लाख                    2 करोड़ 50 लाख              1 करोड़ 25 लाख

नोट - दरें प्रति हेक्टेयर में

Sunday, 11 March 2012

बड़े काम के हैं संशोधन


संशोधन १

बन सकेगा दो प्लॉट पर एक मकान

टीएनसीपी के अनुसार दो प्लॉटों पर अलग-अलग निर्माण ही किया जा सकता था। अधिनियम की धारा ३० में हुए संशोधन के मुताबिक अब ५०० वर्ग मीटर से कम आकार के दो प्लॉटों का संयुक्तिकरण हो सकेगा । पहले दो प्लॉटों के बीच जगह छोडऩे की बाध्यता थी लेकिन नए नियम के तहत ऐसा करने की भी जरूरत नहीं है।


संशोधन  २.


आसान हो जाएगा लैंड यूज में बदलाव 



 कृषि भूमि को आवासीय या व्यवसायिक उपयोग के लिए बदलना आसान नहीं था। लैंड यूज बदलने के लिए निगम व विकास प्राधिकरण से एनओसी लेना जरूरी था। अधिनियम की धारा २३ (क) में हुए संशोधन के बाद अब निर्धारित शुल्क, जरूरी दस्तावेज देकर लैंडयूज को आसानी से बदला जा सकेगा।

संशोधन   ३. 



लिखत पर नहीं लगेगा रजिस्ट्रेशन शुल्क

विकास प्राधिकरणों से किसी तरह के करार (एग्रीमेंट) के लिए उसकी लिखत (नोटरी) पर पहले शुल्क देना होता था लेकिन संशोधन के बाद अब इस लिखत के लिए रजिस्ट्रीकरण शुल्क के प्रावधान को हटा दिया गया है। इससे जनता को फायदा होगा और अनावश्यक शुल्क नहीं देना होगा।



मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम १९७३ के मूल अधिनियम में संशोधन किया गया है। इसे अब मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधित) अधिनियम २०११ नाम दिया गया है। इस मूल अधिनियम की धारा 16, 17 (क), २९,३०, ५६ में संशोधन किया गया है। अधिनियम में सेे धारा २४,५४ के नियमों को हटाया गया है। इसी में धारा ५१ की स्थापना की गई और धारा ५६(क), ५६(ख) को भी शामिल किया गया है।
प्रदेश के राज्यपाल ने मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम २०११ में संशोधन के लिए अनुमति दे दी थी जिसके पश्चात मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में 3 जनवरी २०१२ को इसका प्रकाशन भी कर दिया गया था। अब इसी संशोधित अधिनियम के लिए नियमों का प्रकाशन किया जाना हैे

Tuesday, 21 February 2012

शहर को बड़ा करने की अधिसूचना जारी


शहर को बड़ा करने की अधिसूचना जारी

सीमावृद्धि के कारण इंदौर अपने मौजूदा आकार से दो गुना से भी ज्यादा बढ़ जाएगा

भास्कर संवाददाता  इंदौर

शहर में आस-पास की 27 पंचायतों के 29 गांवों को शामिल किए जाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। 17 मार्च तक प्रभावित गांवों के लोग दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। मामला निगम सीमा से संबंधित होने के कारण प्राप्त होने वाले दावे, आपत्ति और सुझाव पर निगम प्रशासन कलेक्टोरेट को अपना मत देगा। जिला प्रशासन अपना अभिमत सरकार को भेजेगा। अधिसूचना का अंतिम प्रकाशन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा।

शहर का मौजूदा क्षेत्रफल 131.17 वर्ग किमी है। 29 गांवों के शामिल होने से इसमें 147.14 वर्ग किमी जमीन और जुड़ जाएगी। सीमावृद्धि के कारण इंदौर अपने मौजूदा आकार से दो गुना से भी ज्यादा (278.31) बढ़ जाएगा। इसके बाद गांवों को शहर जैसी सुविधाएं मिलने लगेंगी।

जनपद और जिला पंचायत की सीमा भी बदलेगी


Thursday, 16 February 2012


पीथमपुर में सवा करोड़ रुपए हेक्टेयर होगी गाइडलाइन!
 
पीथमपुर में सवा करोड़ रुपए हेक्टेयर होगी गाइडलाइन! 
प्रस्ताव पास हुआ तो दो साल में पांच गुना हो जाएगी बढ़ोतरी 
यज्ञदत्त परसाई त्न धार
इंदौर से सटे औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर की जमीनों के भाव आसमान छू रहे हैं। प्रशासन ने वर्ष 2012-13 की सरकारी गाइडलाइन में यहां 25 फीसदी बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव बना लिया है।

यदि भोपाल से मंजूरी मिल गई तो पीथमपुर मार्ग पर जमीन का भाव सवा करोड़ रुपए हेक्टेयर हो जाएगा। 2011-12 में प्रचलित गाइडलाइन एक करोड़ रुपए हेक्टेयर है। 2010-11 में पीथमपुर में सिंचित जमीन की गाइडलाइन 46 लाख और असिंचित की 28 लाख रुपए हेक्टेयर ही थी। उसके बाद गाइडलाइन समान रूप से एक करोड़ रुपए कर दी गई है। नए प्रस्ताव से दो साल में यहां असिंचित जमीन की गाइडलाइन लगभग पांच गुना तक बढ़ जाएगी।



अगले वर्ष के लिए पूरे पीथमपुर नपा क्षेत्र में गाइडलाइन में 56.47 प्रतिशत की औसत वृद्धि करने का प्रस्ताव है।

फोरलेन वाले गांवों में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि होगी

धार जिले में नए फोरलेन बनने के बाद छोटे गांवों में भी जमीन महंगी हो गई है। इसका अंदाजा नए फोरलेन किनारे स्थित धार तहसील के गांव नियामतखेड़ी से लगाया जा सकता है। यहां अभी की गाइडलाइन में सिंचित जमीन 15 लाख रुपए हेक्टेयर और असिंचित 10 लाख रुपए भाव की बताई गई है। नए वर्ष में यहां दोनों तरह की जमीनों के भाव 50 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसी तरह बग्गड़ रोड पर 11.5 लाख को बढ़ाकर 40 लाख रुपए हेक्टेयर करने की संभावना है। गुणावद में गाइडलाइन से भाव 35 लाख से 60 लाख हो जाएंगे।

इसलिए हो रही है इतनी बढ़ोतरी

- सरकार ने पिछले वर्ष स्टाम्प ड्यूटी की दर घटा दी थी। इसकी भरपाई के लिए सरकारी गाइडलाइन को वास्तविक बाजार मूल्य तक ले जाने के निर्देश दिए थे ताकि स्टाम्प ड्यूटी का राजस्व न घटे।

- नए फोरलेन तेजी से बन रहे हैं। पिछले चार साल में जिले में दो निर्माणाधीन सहित कुल पांच नए फोरलेन अस्तित्व में आए हैं।



यह है प्रति हेक्टेयर का प्रस्ताव

क्षेत्र प्रचलित दर प्रस्तावित गाइडलाइन

पीथमपुर रोड पर 1 करोड़ 1.25 करोड़

अंदर की तरफ में 80 लाख 1 करोड़

(मंडलावदा, धन्नड़, बगदून, सागौर, बरदरी, खेड़ा, अकोल्या मार्ग पर भी 80 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपए की गाइडलाइन की जा रही है)